Viral Fever Symptoms In Hindi Homeopathic Dawa

Viral Fever Symptoms In Hindi वायरल बुखार को सामान्य बोलचाल की भाषा में इसे ‘फ्लू’ (flu) कहा जाता है। यह एक तरह का संक्रामक (फैलने वाला) बुखार है जो कीटाणुओं (viruses) के हमले के कारण होता है।कीटाणुओं के शरीर में प्रवेश कर जाने के बाद रोगी को सर्दी हो जाती है और ठंड लगकर बुखार आ जाता है। बुखार के साथ सिरदर्द होता है। जोड़ों और मांसपेशियों (muscles) में दर्द होता है। तेज सूखी खाँसी होती है।

Viral Fever Symptoms In Hindi : Viral fever symptoms and treatment in hindi

Viral Fever Symptoms In Hindi

Viral fever होम्योपैथी इन हिंदी

खाँसी बहुत हो तक्लीफदेह होती है। गले में दर्द होता है। आँखों के गोलों में दर्द होता है। आँख व नाक से पानी गिरता है। बुखार 105 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है। कई रोगियों को मतली होती है, उल्टियां होती हैं और जुलाई होते हैं। सही ढंग से इलाज न होने पर ‘न्यूमोनिया हो जाने का खतरा रहता है। यह Viral Fever Symptoms In Hindi 4 दिन से 8 दिन तक रहता है।

वायरल फीवर की होम्योपैथिक दवाइयां – In Hindi Homeopathic dawa 

 

एकोनाइट (Aconite) 6, 30, 200 : 

  • यह ‘फ्लू’ की प्रथम अवस्था (first stage) की दवा है। बेहद बेचैनी, करवटें बदलना, बेहद प्यास और मौत का डर, इस दवा के प्रमुख लक्षण हैं। रोगी को तेज बुखार होता है ।
  • बुखार में रोगी का चेहरा लाल हो जाता है। आँख और नाक से पानी बहता है। सूखी तक्लीफदेह खाँसी होती है। बुखार के साथ तेज प्यास रहती है। रोगी ठंडा पानी पीना चाहता है।
  • Viral Fever Symptoms In Hindi में रोगी बेहद बेचैन रहता है, बार-बार करवटें बदलता है सोचता है कि वह बचेगा नहीं, मर जाएगा। रोगी का बदन गर्म और सूखा रहता है। पसीना नहीं होता। पसीना आने के बाद रोगी को आराम आ जाता है।

दवाई कैसे लें –

“एकोनाइट” की 6, 30 या 200 शक्ति में से एक शक्ति दिन दो बार ले। Viral Fever Symptoms In Hindi

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जेल्सीमियम (Gelsemium) 6, 30, 200 :

  • ‘फ्लू’ की शुरुआत में ही यह दवा दी जानी चाहिए। यह दवा उन लोगों को भी दी जाती है जो ‘फ्ल्यू हो जाने के बाद कभी ठीक न हुए हों। रोगी को लगातार ठंड लगती रहती है। बेहद छींक आती हैं।
  • नाक से पतला, नाक की खाल उधेड़ देने वाला पानी बहता रहता 8 है। बुखार के वक्त बेहद सुस्ती रहती है। रोगी को देखकर ऐसा लगता है कि नशे में है। आँखों में नींद भरी रहती है। वह सोना चाहता है। पूरे शरीर में दर्द रहता है। सिर के पिछले हिस्से और माथे में हल्का दर्द रहता है। ज्यादा पेशाब होने से सिरदर्द में आराम आता है।
  • बुखार में चेहरा लाल हो जाता है। माथा गर्म रहता है, लेकिन हाथ-पैर ठंडे रहते हैं। रोगी को प्यास नहीं लगती। जुबान बाहर निकाल पर कीमती है। उनींदापन (drowsiness), प्यास न होना, कमर और पूरे ब में दर्द है इस दवा के विशेष लक्षण हैं। Viral Fever Symptoms In Hindi

दवाई कैसे ले –

“जेल्सीमियम” की 6, 30 या 200 शक्ति में से एक।शक्ति दिन में तीन बार ले।

 

यूपेटोरियम प्फोलियेटम (Eupatorium perfoliatum) ( 30, 200 : 

  • हड्डियों और मांसपेशियों (muscles) दर्द होना इस दवा का विशेष लक्षण है। ऐसा दर्द मानों हड्डियाँ टूट रही हो आँख के देलों में होता है। सुबह 7 से 9 के बीच ठंड लगकर बुखार आता है। बुखार के रोगी बेहद बेचैन रहता है ठंड लगने से पहले, ठंड लगते वक्त और वक्त बुखार के वक्त प्यास लगती है, लेकिन पानी पीने के बाद कड़वी उल्टी हो जाती है।
  • सूखी खाँसी आती है, जिससे सिर और छाती में दर्द होता है। रोगी खाँसते ब छाती को अपने हाथों से पकड़े रहता है। बुखार में पसीना या तो बहुत कम होता है या बिल्कुल ही नहीं होता। पसीना आने पर सिरदर्द के अलावा बाकी लक्षणों (बुखार और बदन दर्द) में आराम आ जाता है।

दवाई कैसे ले –

“यूपेटोरियम प्फोलियेटम” की 6,30 या 200 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

आर्सेनिक एल्बम (Arsenic album) 30, 200 : 

  • यह ‘फ्ल्यू’ की प्रमुख दवा है। नाक से चमड़ी उधेड़ देने वाला पतला पानी बहना, थकावट और कमजोरी इस दवा के प्रमुख लक्षण हैं रोगी को जोरदार छींकें आती हैं। नाक से तेज पतला पानी निकलता है।
  • यह पानी इतना तेज होता है कि नाक में जलन होती है और नथुने लाल हो जाते हैं। नथुनों की चमड़ी उघड़ जाती है। गले में जलन होती है, जिसमें गर्म पेय (hot drinks) पीने से आराम मिलता है। बुखार आने के पहले रोगी को ठंड लगती है। रोगी चादर ओढ़कर लेटे रहना चाहता है।
  • ठंड के समय प्यास नहीं होती, लेकिन जब बुखार ज्यादा हो जाता है तो रोगी को बेहद प्यास लगती है। रोगी थोड़ी-थोड़ी देर से लेकिन सिर्फ एक-एक बूंद पानी पीता है। हर बार पानी पीने से कंपकंपी बढ़ जाती है। लेकिन प्यास का यह लक्षण बुखार के तेज आक्रमण के समय ही होता है। रोगी मानसिक तौर पर बेचैन होता है।
  • रोगी बेचैनी की वजह से बार-बार जगहें बदलता है। कभी यहां बैठता है कभी वहां, कभी एक बिस्तर पर लेटता है, कभी दूसरे पर एक बिस्तर पर या एक कुर्सी पर लेटे रहना या बैठे रहना मुश्किल हो जाता है यह लक्ष्ण बीमारी का तेज हमला होने पर ही होता है।

दवाई कैसे ले-

“आर्सेनिक एल्बम” की 30 या 200 शक्ति में से एक शक्ति दिन में तीन बार ले।

 

रस टोक्स . (Rhus for.) 30, 200: 

  • सभी हड्डियों में दर्द, कमजोरी और बेचैनी इस दवा के महत्वपूर्ण लक्षण है। रोग का हमला होने पर रोगी को छींक आती हैं। ठंड लगने से काफी पहले खांसी आने लगती है, लेकिन बुखार चढ़ते ही खाँसी कम हो जाती है।
  • गला अंदर से लाल हो जाता है और दर्द करता है। बुखार चढ़ते ही पूरे बदन में, खासकर कमर में दर्द होता है। रोगी शारीरिक तौर पर बेचैन रहता है और बार-बार करवटें बदलता है, जिससे उसे आराम मिलता है। आर्सेनिक एल्बम (Arsenic album) की तरह इस दवा का रोगी भी बार-बार और थोड़ा-थोड़ा पानी पीता है।

दवाई कैसे ले-

“रस टॉक्स” की 30 या 200 शक्ति में से एक शक्ति दिन में तीन बार ले।

 

बायोनिया (Bryonia) 6, 30, 200 : 

  • रोग का संक्रमण हो जाने के बाद रोगी को छींक आती है और नाक से पतला पानी निकलने लगता है। युखार तेज रहता है। बेहद तक्लीफ देने वाली खांसी रहती है।
  • खांसी के कारण सीने में सूई चुभने जैसा दर्द होता है। पूरा बदन दर्द करता है। हिलने-डुलने से दर्द बढ़ता है और चुपचाप लेटे रहने से दर्द में आराम मिलता है जोरदार सिरदर्द होता है। ऐसा लगता है कि दर्द के कारण सिर फट जाएगा।
  • रोगी का मुंह खुश्क रहता है, हॉठ सूखे रहते हैं। रोगी अपनी जान से होंठों को बार-बार भिगोता रहता है रोगी को बेहद प्यास लगती है, वह देर-देर से ज्यादा पानी पीता है। मुँह का स्वाद कड़वा हो जाता है।
  • जुबान पर पीला या सफेद लेप चढ़ जाता है। बिस्तर में उठकर बैठने से जी मतलाता है और चक्कर आते हैं। खाँसते-खाँसते उल्टी हो जाती है। रोगी को कब्जियत रहती है।
  • पाखाना कड़ा और सूखा रहता है, मानों जला हुआ हो। रोगी बेहद चिड़चिड़ा हो जाता है। किसी से बातचीत करना नहीं चाहता। कोई बात करे तो चिढ़ जाता है। चुपचाप लेटे रहना चाहता है। पसीना आने पर रोगी को आराम आ जाता है।

दवाई कैसे ले-

“बॉयोनिया” की 30 या 200 शक्ति में से एक शक्ति दिन में तीन बार ले।

 

एलियम सीपा (Allium cepa) 30, 200 : 

  • छींक आती हैं और नाक से तेज पतला पानी बहता है, जिसकी वजह से नाक लाल हो जाती है। आँखों से सादा (न लगने वाला) पानी निकलता है।
  • हल्का बुखार हो जाता है। गले में दर्द होता है, आवाज भारी हो जाती है। जोरदार खांसी आती है। रोगी खाँसते वक्त गले पर हाथ रखता है। रोगी को सिरदर्द रहता है।
  • खुली हवा में टहलने से छींक और सिरदर्द में कमी आती है लेकिन कमरे में घुसते ही दोनों ही शुरू हो जाते हैं सर्दी और बुखार के समय होगी को बाबा पेशाब आता है।

दवाई कैसे ले-

“एलियम सेपा” की 30 या 200 शक्ति में से एक शक्ति दिन में तीन बार ले।

 

Note : Viral Fever Symptoms In Hindi

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