ramayan kisne likha

ramayan kisne likha, रामायण किसने लिखी है –

 

ramayan kisne likha, जग में सुंदर है दो नाम चाहे कृष्ण कहो या फिर राम । भगवान राम और कृष्ण पर जितनी ग्रंथ, भाष्य ,व्याख्यान आदि लिखे गए हैं , जितनी शायद किसी और भगवान पर नहीं लिखे गए हैं । कहते हैं हरि अनंत है , हरि की कथा भी अनंत है सब संत अपने-अपने भाग में कहते सुनते हैं श्री रामचंद्र जी का सुंदर चरित्र करोड़ों पलकों में भी नहीं गाया जा सकता । सब लोगों ने रामायण के विषय में तो सुना ही होगा रामायण भगवान श्रीराम के ऊपर लिखी गई ,है इसमें श्री राम के जन्म से लेकर, सीता माता से विवाह, रावण का वध और फिर सीता के वनवास जाने तक की सारी कहानी उपलब्ध है और इसमें माता सीता के धरती में समाने की कहानी भी है। कहा जाता है रामायण को भगवान श्री राम के लिए ही लिखा गया था और वह श्रीहरि के ही स्वरूप से जो मानव रूप में धरती पर आए थे धरती से बुराई का नष्ट करने के लिए।

ramayan kisne likha, हमने रामायण के विषय में तो आपको बता दिया कि रामायण में क्या-क्या लिखा गया है लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि रामायण को किसने लिखा था तो आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे की रामायण की रचना किसने की थी।

 

ramayan kisne likha tha, रामायण किसने लिखी थी –

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1 ) ramayan kisne likha, रामायण महाकाव्य के रचयिता महर्षि वाल्मीकि थे ,उन्होंने ही राम चरित्र नामक काव्य की रचना भी की थी और हमारा सबसे बड़ा महाकाव्य रामायण के रचयिता भी यही है।

2 ) रामायण में पुरुषोत्तम राम की पूरी कहानी दी गई है कि उन्होंने कैसे धरती पर से बुराई का नष्ट किया था और भगवान श्रीराम को पुरुषोत्तम क्यों कहा जाता है।

3 ) जब भी धरती पर सुखी वैवाहिक पति, पत्नी की बात की जाती है, तो श्री राम और सीता जी का नाम ही लिया जाता है, क्योंकि यही थे जो एक सर्वोत्तम पति थे और सर्वगुण संपन्न पत्नी थी जो हर सुख और दुख में एक दूसरे का साथ निभाते थे।

4 ) ramayan kisne likha, बहुत सारे रचियता ने अपनी अपनी भाषा में रामायण की रचना की थी ,लेकिन यह कोई नहीं जानता कि रामायण की सबसे पहली रचना श्री हनुमान ने की थी जिसको हनुमद रामायण कहा जाता है।

5 ) ramayan kisne likha, अब बात इस पर आती है कि जब श्री हनुमान ने भगवान श्री राम के ऊपर हनुमद रामायण नामक रचना की थी, तो यह हम सबके सामने क्यों नहीं आई क्योंकि बजरंगबली ने हनुमत रामायण को समुद्र में फेंक दिया था इसलिए कभी इसको कोई पढ़ नहीं पाया।

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6 ) ramayan kisne likha, लेकिन श्री हनुमान ने भगवान श्री राम पर लिखी गई पुस्तक को ऐसे समुद्र में क्यों फेंक दिया ।ऐसा कहा जाता है कि जब श्री राम और रावण का युद्ध हुआ था और उसमें जब रावण परास्त हो गया था और श्री राम की विजय हुई थी उसके बाद बजरंगबली ने हनुमत रामायण लिखना शुरू की थी। युद्ध खत्म होने के बाद बजरंगबली शंकर जी की आराधना करते हुए हिमालय पर्वत पर चले गए और वहां पर अपनी तपस्या के दौरान उन्होंने वहां  की पर्वत श्रंखला पर अपने नाखून से भगवान श्री राम की लीलाओं का उल्लेख करते हुए हनुमद रामायण की रचना की थी।

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7 ) ramayan kisne likha, फिर कहा जाता है जब महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी तब उनके मन में इस रचना को शंकर जी को दिखाने की इच्छा प्रकट हुई , वह अपनी रामायण को लेकर भगवान शंकर के धाम कैलाश पर्वत पर पहुंच गए , वहां पर उन्होंने श्री हनुमान को और उनके द्वारा लिखी गई हनुमद रामायण को देखा । हनुमद रामायण को देखकर बाल्मीकि जी निराश हो गए , बाल्मीकि जी को निराश देखकर बजरंगबली ने उनकी निराशा का कारण पूछा , तो महर्षि बोले कि उन्होंने कठोर परिश्रम के बाद जो रामायण लिखी है। वह हनुमद रामायण की तुलना में कुछ भी नहीं है और आने वाले समय में उनकी रचना उपेक्षित रह जाएगी । तब बजरंगबली ने महर्षि बाल्मीकि को सुनने के बाद हनुमद रामायण को अपने कंधे पर उठाया जो कि एक पर्वत श्रंखला थी, और दूसरे कंधे पर महर्षि वाल्मीकि को बैठाकर समुद्र के पास गए, और उन्हीं के सामने श्री राम पर अर्पित की हुई हनुमद रामायण को उन्होंने समुद्र में डाल दिया।

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8 ) ramayan kisne likha, तब से ही श्री बजरंगबली द्वारा लिखी गई हनुमद रामायण आज तक हमने नहीं पड़ी है ।भगवान बजरंगबली की यह महानता देखकर महर्षि बाल्मीकि जी बोले हे, महा भक्त हनुमान आप धन्य हैं , आप जैसा कोई ज्ञानी और दयावान नहीं है , हे हनुमान आप की महिमा का गुणगान करने के लिए मुझे एक जन्म और लेना होगा और मैं वचन लेता हूं कलयुग में एक और रामायण की रचना के लिए जन्म लूंगा तब मैं यह रामायण आम लोगों की भाषा में लिखूंगा। ऐसा माना जाता है राम चरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ही महर्षि वाल्मीकि का दूसरा अवतार है । गोस्वामी तुलसीदास जी भी राम चरित्र मानस की रचना करने से पहले भगवान हनुमान का गुणगान करते हैं और हनुमान चालीसा का भी अध्ययन करते हैं। हनुमान जी की प्रेरणा से ही गोस्वामी तुलसीदास राम चरित्र मानस लिखते हैं ।

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