cell ki khoj

cell ki khoj, सेल की खोज किसने की –

 

cell ki khoj, सेल हम सभी मानव और जंतुओं में पाई जाती है यानी कि जो भी जीवित चीज होती है उनके अंदर सेल पाई जाती है और मानव का शरीर बहुत सारी कोशिकाओं से मिलकर ही बना होता है । सेल  ही हमारे शरीर को आकार देती हैं और हमारे भोजन से जो उनको पोषक तत्व मिलते हैं, उससे वह ऊर्जा का निर्माण करती है। सेल के अंदर डीएनए और अनुवांशिक पदार्थ भी पाए जाते हैं। इसलिए हमारे शरीर में सेल का बहुत महत्व होता है इससे ही हमारा पूरा शरीर चलता है।

cell ki khoj, यह सब जानकारी तो सबके पास ही है कि कोशिका क्या होती है ,इसका काम क्या होता है लेकिन किसी को यह नहीं पता है कि आखिर कोशिका की खोज की किसने है ,उसका का कभी अविष्कार नहीं हुआ है , क्योंकि जीवित जंतुओं मानव इन सभी में कोशिका तो उपस्थित थी, लेकिन किसी ने उसको नाम नहीं दिया था ।इसकी खोज की गई थी तो सबसे पहले इसकी खोज किसने की, कहां की ,कब की इसके बारे में आज के इस लेख में हम जानेंगे।

 

cell ki khoj kisne ki thi, सेल की खोज किसने की –

1 ) cell ki khoj, सबसे पहले सेल की खोज इंग्लैंड के रहने वाले रॉबर्ट हुक ने की थी ,उन्होंने इसकी खोज सन 1665 में की थी। जब वह एक एक्सपेरिमेंट कर रहे थे ,तब उन्होंने बोतल के एक पतली टुकड़ों को कंपाउंड माइक्रोस्कोप के नीचे रख दिया और जब उन्होंने उसने देखा तो उन्हें हजारों छोटे-छोटे चित्र नजर आए। तब उन छोटी-छोटी चित्रों को उन्होंने सेल का नाम दिया और सेल्स एक लैटिन शब्द होता है जिसका वास्तव में अर्थ होता है  ~एक छोटा कमरा।

2 ) cell ki khoj, लेकिन उस समय पर रॉबर्ट हुक उन छिद्रों की वास्तविक संरचना क्या होती है और उनका काम क्या होता है। इसके बारे में नहीं जानते थे और वह जिन क्षेत्रों को सेल मान रहे थे वह वास्तव में पौधे के ऊतकों की खाली कोशिका की दीवारें ही थी। उस समय पर इतने अच्छे मायस्कूट नहीं थे कि हम यह देख पाए कि आखिर वह चित्र कोशिका की दीवार है या फिर कोशिका खुद है इसलिए उस एक्सपेरिमेंट को वहीं पर छोड़ दिया।

3 ) आगे जैसे ही साल निकलते गए कुछ सालों बाद और वैज्ञानिकों ने सेल और उसकी वास्तविक संरचना के बारे में  खोजें की और उन्होंने पाया कि सेल जब बाहरी और आंतरिक समस्याओं से क्षतिग्रस्त हो जाती है ,तब वह स्वयं को नष्ट करके हमारे पूरे शरीर की रक्षा करती है और कुछ काम के इस प्रकार स्वयं को नष्ट करने की प्रक्रिया को अपॉप्टोसिस कहा जाता है।

4 ) cell ki khoj, सेल के भी बहुत सारे प्रकार होते हैं इसी तरह सन 1674 में डच वैज्ञानिक एंटोनी वन लियूवेनहोएक ने जीवित कोशिका की खोज की और इन्होंने ही प्रोटोजोआ बैक्टीरिया और शुक्राणु कोशिका की खोज भी की थी।

5 ) cell ki khoj, सेल की पूरी जानकारी सेल थ्योरी में दी गई है और इसका प्रतिपादन 1838 में थियोडोर स्वान और मैथियास जैकब ने किया था।

6 ) सेल के अध्ययन को साइटोलॉजी कहा जाता है, इस विज्ञान के अंतर्गत कोशिका की संरचना एवं कार्य का अध्ययन किया जाता है।

7 ) cell ki khoj, जैसा कि हमने बताया हमारे शरीर में बहुत सारी कोशिकाएं होती हैं, लेकिन सबसे छोटी कोशिका को माइकोप्लाज्मा कहा जाता है। इसका आकार लगभग 10 माइक्रोमीटर होता है मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु की कोशिका को मारा जाता है। और दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग पक्षी के अंडे को माना जाता है, मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी कोशिका डिंब को माना जाता है।

8 ) cell ki khoj, हमारे शरीर में मुख्य रूप से कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं, अकेंद्रिक कोशिका, सुकेंद्रिक कोशिका।

अकेंद्रीक कोशिका एक ऐसी कोशिका होती है जिसके मध्य में केंद्र नहीं पाया जाता ।इस प्रकार की कोशिका वाले जीवो का आकार बहुत छोटा होता है जैसे कि विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया। सुकेंद्रिक कोशिका में केंद्रक मध्य में पाया जाता है, इस प्रकार की कोशिका आकार में अकेंद्रिक कोशिका से बड़ी होती है और इनकी संरचना भी जटिल होती है। इस प्रकार की कोशिकाएं मनुष्य और पौधे में पाई जाती हैं।

Note-

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