बवासीर की होम्योपैथिक दवाइयां – Bawasir Kaise Hota Hai In Hindi Aur Hoemopathic Dawa

Bawasir Kaise Hota Hai In Hindi

Piles Treatment – बवासीर की होम्योपैथिक दवाइयां 

bawasir kaise hota hai in hindi मलद्वार की नसों में अंगूर जैसे मस्सें से पैदा होने को “बवासीर” कहते हैं. यह मस्सें मलद्वार के अंदर भी होते हैं और बाहर भी। इन मस्सों के अनुसार बवासीर भी दो प्रकार की होती है- भीतरी और बाहरी.

जब मस्सों से खून निकलता है तो उसे खूनी बवासीर (Bleeding piles) कहा जाता है और जब मस्सों से खून नहीं निकलता है, तो उसे बादी बवासीर (Blind piles) कहा जाता है।

यह बीमारी हो जाने पर मलद्वार में काँटा से चुभता है और जलन होती है। चलने-फिरने, बैठने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है। पखाना करते समय बहुत तकलीफ होती है। होम्योपैथिक दवाओं से यह बीमारी ठीक हो जाती है,  ( bawasir kaise hota hai in hindi )लेकिन कभी-कभी मस्सों का ‘ऑपरेशन’ भी कराना पड़ता है। bawasir kaise hota hai in hindi

Bawasir Kaise Hota Hai In Hindi

बवासीर की होम्योपैथिक दवाइयां – bawasir kaise hota hai in hindi

अगर आपको मस्सों की बीमारी को जड़ से खत्म करना चाहते हैं तो नीचे दी गई और बैठी सवारियों के लक्ष्मण के अनुसार आप होम्योपैथिक दवाइयों का सेवन कर सकते हैं।

 

1- एक्यूलस (Aesculus) 6, 30 –

a- जिन लोगों के मस्सें बाहर निकले हुए नीले रंग के और बड़े होते हैं उन में यह दवा उपयोगी है।

b- मस्सों में चाकू से काटने जैसा दर्द होता है। bawasir kaise hota hai in hindi

c- मस्सो की वजह से रोगी ना तो बैठ सकता है और ना लेट सकता है और ना ही खड़ा रह सकता है।

d- मलद्वार सूखा रहता है। ऐसा लगता है मानो मलद्वार में छोटी-छोटी लकड़ियां ठुसी हुई है।

f- मलद्वार में जलन और दर्द होता है। रोगी को मलद्वार में भारीपन का अनुभव होता है। पखाना हो जाने के बाद भी बहुत देर तक मलद्वार में दर्द होता है। 

g- पखाना सूखा और कड़ा रहता है और गाँठ-गाँठ  करके निकलता है।

h- कमर के निचले हिस्से में धीमा धीमा दर्द रहता है। bawasir kaise hota hai in hindi

i- यह दवा “बादी बवासीर” में विशेष रूप से लाभदायक है, लेकिन “खूनी बवासीर” में भी यह लाभ पहुंचाती है।

 

दवा कैसे ले –

“ऐस्क्यूलस” की 6 या 30 शक्ति दिन में दो से 3 तीन बार ले।

 

2- कलिंसोनिया (Collinsonia) 30 –

a- यह दवा “खूनी बवासीर” में ज्यादा लाभदायक है. इसके बवासीर में बहुत दर्द होता है. bawasir kaise hota hai in hindi के मस्से बाहर निकल आते हैं. मस्सों में काफी खून निकलता है  

b- रोगी को लगता है कि उसके मलद्वार में छोटी-छोटी लकड़ियां ठुसी हुई है।

c- रोगी को सख्त कब्ज रहती है। पखाना सूखा, कड़ा रहता है और बड़ी मुश्किल से निकलता है।

 

दवाई कैसे ले –

“कलिंसोनिया” की 30 शक्ति दिन में दो से तीन बार ले।

 

3- एलॉय सकरोट्रीना (Aloe Sacrotrina) 30 –

a- एलॉय सकरोट्रीना के अंगूर के गुच्छे जैसे मस्से होते हैं, जो पखाना करते समय निकल आते हैं।

b- मस्सों में खुजली होती है, उनसे खून निकलता है और जलन होती है।

c- ठंडे पानी से धोने पर दर्द और जलन में आराम मिलता है।

d- दस्त होते हैं दस्त में आज मिली रहती है कमर दर्द होती है।

 

दवाई कैसे ले –

“एलॉय सकरोट्रीना” की 30 शक्ति दिन में दो से तीन बार ले।

 

4- नक्स वोमिका (Nux Vomica) 30 –

a- वे लोग जो शारीरिक परीक्षा में बिल्कुल नहीं करते चाय, कॉफी, शराब, चरस, गांजा का सेवन किया करते हैं। उनकी “बादी बवासीर” में नक्स वोमिका विशेष रूप से उपयोगी है। बवासीर के मस्सों में खुजली होती है। 

b- खुजली के कारण रोगी रात भर सो नहीं सकता है। ठंडे पानी से धोने पर खुजली में आराम मिलता है।

c- पखाना करते समय मस्सें से बाहर निकल आते है। मस्सों में सुई चुभने जैसा दर्द होता है।

d- मस्सों में जलन होती है। रोगी को सख्त कब्ज रहती है। बार-बार खाने की इच्छा होती है लेकिन हर बार पखाना हो जाने के बाद रोगी को ऐसा लगता है कि पेट अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है।

 

दवाई कैसे ले –

“नक्स वोमिका” की 30 शक्ति दिन में दो से तीन बार ले।

 

5- कैप्सिकम (Capsicum) 6, 30 –

a- जलन युक्त खोली और खुजली करने वाली bawasir kaise hota hai in hindi में यह दवा विशेष रूप से उपयोगी है।

b- पखाना करते समय मलद्वार में बहुत ज्यादा जलन होती है। रोगी को ऐसा लगता है कि मलद्वार में लाल मिर्च की पाउडर डाल दी गई हो।

c- इसके रोगी को प्यास बहुत लगती है लेकिन पानी पीने के बाद ठंड सी लगती है।

d- यह दवा उन लोगों के बवासीर में विशेष रूप से लाभदायक है जो मोटे थुलथुले होते हैं। शारीरिक परीक्षण नहीं करते, चाय, कॉफी और मसालेदार चीजें खाने पीने से जिनकी पाचन शक्ति कमजोर हो गई है।

 

दवाई कैसे ले-

“कैप्सिकम” की 6 या 30 शक्ति दिन में तीन बार ले।bawasir kaise hota hai in hindi

 

6- हमामेलिस विर्ग. (Hamamelis Virg.) 3, 6 –

a- इसमे bawasir kaise hota hai in hindi के मस्से सूजे हुए और खून से भरे हुए और नीले या बैगनी रंग के होते हैं।

b- मस्सों से निकलने वाला गहरे लाल रंग का होता है।

c- कमर में दर्द रहता है जो कूल्हों तक जाता है रोगी को लगता है कि उसकी कमर टूट जाएगी।

 

दवाई कैसे ले-

“हमामेलिस विर्ग.” की 3 या 6 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

7- म्यूरेटीक एसिड (Muriatic Acid) 6, 30 – bawasir kaise hota hai in hindi

a- यह बवासीर की प्रमुख दवाओं में से एक है।

b- इस वा से ठीक होने वाली बवासीर के मस्से अंगूर के गुच्छे की तरह सूखे हुए और नीले रंग के होते हैं।

c- मस्सों में बहुत ज्यादा दर्द होता है। मस्सों को छुआ नहीं जा सकता है। मस्सों को चादर भी छू जाए तो रोगी चिल्ला उठता है।

d- बहुत ज्यादा मुलायम “टॉयलेट पेपर” का इस्तेमाल तक नहीं कर सकता है। ठंडे पानी से धोने पर तकलीफ बढ़ती है और गर्म पानी से धोने पर आराम मिलता है। 

e- पेशाब करते समय बवासीर के मस्से मलद्वार के बाहर निकल आते हैं।

 

दवाई कैसे ले –

“म्यूरेटिक एसिड” 6 या 30 शक्ति दिन में दो बार लें।

 

8- नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) 30 –

a- नाइट्रिक एसिड के मस्सें में काँटा चुभने जैसे दर्द होता है।

b- bawasir kaise hota hai in hindi पाखाना करते समय में से बाहर निकल आते हैं। मस्सों से चमकीले लाल रंग का बहुत ज्यादा खून निकलता है।

 

दवाई कैसे ले –

“नाइट्रिक एसिड” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।bawasir kaise hota hai in hindi

 

9- कलियम कार्ब. (Kalium Carb.) 30 –

a- कलियम कार्ब के मस्से बड़े और फूले हुए होते हैं और उनमें आगे से जलन होती है।

b- ठंडे पानी से धोने या ठंडे पानी के टब में बैठे रहने से जलन और दर्द में काफी आराम मिलता है।

c- पखाना करते समय मस्सें बाहर निकल आते हैं और उनमें काफी देर तक जलन होती है  मस्सों को छुआ नहीं जा सकता, छूने से दर्द बढ़ता है।

d- कमर दर्द और उसके साथ पसीना और कमजोरी यह कलियम कार्ब का विशेष लक्षण है।

 

दवाई कैसे ले –

“कलियम कार्ब” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

10- रक्स टॉक्स (Rhux Tox.) 30 –

a- बादी बवासीर पखाना करते समय से बाहर निकलना और कमर में कुचलने जैसा दर्द इन सभी लक्षणों के होने पर यह दवा बहुत लाभ पहुंचाती है।

b – रोगी को सुई चुभने जैसा दर्द होता है।

 

दवाई कैसे ले –

“रक्स टॉक्स” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

11- इग्नेटिया अमारा (Ignatia Amara) 30 

 

a- bawasir kaise hota hai in hindi की दवा बहुत ही उपयोगी है।

b- खड़ा होने और बैठने पर मलद्वार में दर्द होता है, लेकिन चलते समय दर्द कम हो जाता है। यह इस दवा का विशेष लक्षण है  बवासीर में चलने फिरने से रगड़ लगती है और रोगी को दर्द होता है।

c- पाखाने के बाद घंटो तक मलद्वार में जख्म होने जैसा दर्द होता है।bawasir kaise hota hai in hindi

d- रोगी को जब कड़ा पखाना होता है उस समय मस्सें बाहर निकलते बल्कि उस समय निकलते हैं जब पखाना पतला होता है। बार-बार पखाने की इच्छा होती है और हर बार पखाना ना निकलकर काँच निकलती है।

 

दवाई कैसे ले –

“इग्नेटिया अमारा” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

12- आर्सेनिकम एलबम (Arsenicum Album) 30 –

a- bawasir kaise hota hai in hindi चाहे जिस तरह की हो आर्सेनिकम एल्बम के मस्सों में आगे से जलन विशेषता रात में होती है 

b- गर्म पानी से धोने या गर्म सेंक से आराम मिलता है।

 

दवाई कैसे ले-

“आर्सेनिकम एलबम” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

13 – कॉस्टिकम (Causticum) 30 –

a- कस्टिकम के मस्सें बड़े और खड़े होते हैं, जिनकी वजह से पखाना बाहर नहीं निकलता है।

b- मस्सों को छूने पर डांस लगने जैसा दर्द होता है। चलने समय दर्द बढ़ जाता है।

c- रोगी को सख्त कब्ज रहती है। बार-बार पाखाने करने की इच्छा होती है लेकिन जोर लगाने के बावजूद पकाना नहीं होता है। रोगी पाखाना निकालने के लिए लगभग खड़ा हो जाता है तब जाकर कहीं पकाना निकलता है।

 

दवाई कैसे ले –

“कॉस्टिकम” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

14- पेओनिया ओफ्फिसिनालिस ( Paeonia Officinalis) 30 –

a- रोगी के मस्सें जख्म युक्त बैगनी रंग के होते हैं।

b- पाखाने के बाद घंटों तक दर्द होता है। दर्द से आराम पाने के लिए रोगी अपने हाथों से दोनों कूल्हों को अलग फैलाए लेटा रहता है या टहलता रहता है।

 

दवाई कैसे ले –

“पेओनिया ओफ्फिसिनालिस” की 30 शक्ति दिन में दो बार ले।

 

15 – सल्फर (Sulphur) 200, 1M –

 

a- भीतरी और बाहरी दोनों तरह की बवासीर में यह दवा उपयोगी है।

b- बड़े-बड़े गुच्छों में बहार आने वाले बवासीर के मस्से रोगी को कब्ज रहती है।

c- मलद्वार के आसपास खुजली होती है। जो रात में बढ़ जाती है।  इसे सल्फर का प्रमुख लक्षण कहा जा सकता है। 

d- बवासीर में डंक मारने जैसा दर्द होता है। पाखाना खाते समय मलाशय (Rectum) से बाहर निकल आता है।

 

दवाई कैसे ले –

 

“सल्फर” की 200 या 1M शक्ति की 15 दिन में सिर्फ एक खुराक दो से तीन महीनों तक और बार मे महीने में एक खुराक कुछ महीनों तक ले।

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