बांझपन का होम्योपैथिक इलाज – Banjhpan Ka Ilaj

बांझपन का होम्योपैथिक इलाज – बिना किसी गर्भनिरोधक के प्रयोग किए बिना नियमित रूप से पति के साथ संभोग ( sex ) के बाद भी जब 2 वर्ष तक स्त्री को गर्भ नहीं ठहरता तो उस स्त्री को “बांझपन” (sterile) कहा जाता है।स्त्री के गर्भवती ना होने मैं कमी पति-पत्नी में से किसी एक नया दोनों में कि हो सकती है इसलिए पति और पत्नी दोनों को test करा लेना जरूरी होता है और जिस किसी ने कमी पाई जाती है उसका बांझपन का होम्योपैथिक इलाज किया जाना चाहिए। 

दोस्तों यहां पर हम सिर्फ स्त्रीयों के बारे में बता रहे हैं बांझपन कई कारणों से हो सकता है गर्भाशय का अपनी जगह से पीछे आ जाना या सामने की ओर टेढा पड़ जाना, गर्भाशय और ovaries का पूरी तरह develop  न होना, महावारी की खराबिया, leaucorrhoea, vagina में सूजन, syphliss, मोटापा, कमजोरी , T.B जैसी बीमारी, sexual desire की कमी आदि कारणों से स्त्री को गर्भ नहीं ठहरने की समस्या आ सकती है, इसलिए बांझपन का होम्योपैथिक इलाज करते वक्त बांझपन के कारण का पता लगा का इलाज करना चाहिए ।

बांझपन का होम्योपैथिक इलाज – Banjhpan Ka Ilaj

बांझपन की होम्योपैथिक दवा – Banjhpan Ki Dawa – Sterility Homeopathic Medicine 

बांझपन का होम्योपैथिक इलाज

Banjhpan Ka Ilaj

दोस्तो नीचे कुछ बांझपन की होम्योपैथिक दवा के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके उपयोग से आप बांझपन का होम्योपैथिक इलाज पा सकते है ।

1- अगनस केस्टस ( agnus castus) 3 –

जो महिलाएं शादी के पहले बहुत ज्यादा अंगुली (masturbation) करती रही हो तो वे बच्चे पैदा करने की शक्ति खो देती है, इनकी ovaries में सूजन रहती है। vagina से लगातार अंडे को सफेदी जैसा (leaucorrhoea) निकलता रहता है. जिससे कपड़े मैं पीले रंग का दाग पड़ जाता हो तो और सेक्सुअल desire कम हो जाती है इन महिलाओं के बांझपन में यह दवा उपयोगी है।

 

2- कोनियम (conium) 200 –

जिन महिलाओं की ज्यादा उम्र हो जाने पर शादी होती है उनके बांझपन ने यह दावा लाभदायक है। जो स्त्रिया sexual desire को दबाकर रखने की वजह से यह महिलाएं बांझपन का शिकार हो जाती है इनकी periods समय से बहुत बाद आती है और खून काम आता है periods जल्दी दो-तीन दिन में खत्म हो जाते हो, periods के पहले breast सख्त हो जाते हो और दर्द करते हो. Periods के 8-10 दिन बाद काफी मात्रा में तीखा, खून मिला अथवा दूध जैसा प्रदर (Leukorrhea) जाता हो, स्त्रीया शीत प्रकृति (chilly) की होती हो, ओर उनकी तकलिफ  ठंड लगने पर बढ़ जाती हो उनके लिए यह दवा बहुत उपयोगी है इस दवा को दिन में 2 बार ले।

 

3- औऱम मुर. नेट्रोनेटम (aurum mur. Natrum) 2x, 3x –

जिन स्त्रीयो का गर्भाशय ढीला पड़ गया है और ओवरीज सूज गयी हो, गर्भाशय की कमजोरी की वजह से जिन्हे periods बहुत देर से ओर काम होती है। ऐसी दिखने वाली महिलाओं के बांझपन में यह दवा लाभदायक है। इस दवा से गर्भाशय की सूजन , गर्भाशय का अपनी जगह से हठ जाना, गर्भाशय की गर्दन और योनि की नाली के जखम भी ठीक हो जाते है। इनके ठीक हो जाने पर स्त्रीयो को गर्भ ठहरता है। इस दवा को दिन में तीन बार ले।

 

4- सीपिया (sepia) 200 –

जो महिलाएं दुबली-पतली , छरहरी, पतली कमर वाली होती है, जिनके स्तन चपटे होते हो, चेहरा पतला हो , नाक और गालो पर धब्बे हो, चेहरे की हड्डियां उभरी हुई हो, जिनका शरीर ऊपर से नीचे तक एक सा होता हो, जिनके period हर बार गड़बड़ होते हो, जिनकी sexual desire खत्म हो गयी हो, sexual intercose painfull होता हो, पेट के निचले हिस्से में खिंचाब होता हो, उनके बांझपन में यह दवा उपयोगी है। यह दवा दिन में दो बार लेनी है।

 

5- नैट्रम मुर (natrum mur) 200 –

जिन स्त्रीयो को इस दवा की जरूरत होती है वे भी सीपिया (sepia) दवाई की ही तरह दुबली-पतली, रक्तशुन्य, कमजोर होती है। उन्हें नमकीन चीजे ज्यादा पसंद होती है (सीपिया की स्त्रीयो को दूध से नफरत होती है) संभोग के समय इनकी vagina सुखी रहती हो इसलिए sexual intercose के समय ऐसी स्त्रीयो को दर्द होता हो। गर्भाशय अपनी जगह से हटा हुआ होता है। leucorrohoea तेज ओर दर्द वाला रहता हो, periods समय से पहले आ जाते हो, bleeding ज्यादा होती हो और कई दिनों तक जाता रहता हो. साथ मे कमर में दर्द रहता हो। अगर आपको इस प्रकार की समस्याए हो तो आपके लिए ये दवा लाभकारी रहेगी। इस दवा का उपयोग आप दिन में दो बार ले सकते है।

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Updated: June 4, 2020 — 9:38 am

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